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कुआं बना काल… 9शव निकाले, 4 लापता


  • तीन जेसीबी, 400 जवानों की मदद से चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
  • भुरभुरी जमीन और कुएं में बार-बार पानी भरने से रेस्क्यू ऑपरेशन में आ रही बड़ी दिक्कत  
  • लोगों को ढूंढने के लिए कुएं के आसपास 40 फीट जमीन खोदी
  • सरकार ने मृतकों के परिवार को 5-5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की

     

विदिशा/भोपाल । विदिशा के गंजबासौदा के लाल पठार में कुएं में गिरे लोगों में से 4 अब भी लापता है। 20 घंटे ऑपरेशन के बाद भी इनका पता नहीं चल सका है। अब तक 9 लोगों की लाश निकाली जा चुकी है। उधर सरकार ने मृतकों के परिवार को 5-5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की है। वहीं रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी दिक्कत भुरभुरी जमीन और कुएं में बार-बार पानी भर जाना है। रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस-प्रशासन के 400 लोग जुटे हुए हैं। इसके साथ ही कुएं से लापता लोगों को ढूंढने के लिए तीन जेसीबी की मदद ली गई है। घटनास्थल पर तीन एंबुलेंस तैयार रखी गई हैं, हालांकि अब किसी के भी जीवित बचने की संभावना बहुत कम है। तीन जेसीबी के जरिए कुएं के आसपास 40 फीट जमीन खोदी गई है, ताकि जल्द लोगों को ढूंढा जा सके।

17 घंटे बाद भोपाल से पहुंचे पंप

गंजबासौदा हादसे  के रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी लापरवाही सामने आयी है। पूरे 17 घंटे बाद भोपाल से कुएं से पानी निकालने के लिए 5 हाई पावर पंप पहुंचाए गए। सरकार का कहना है हादसे की सूचना देर से दी गई। पहले लोकल लेवल पर ही बचाव कार्य प्रशासन करता रहा। जब देर हो गई तब भोपाल खबर की गई। इन पंप को इसलिए भेजा गया क्योंकि पहले जिन पंपों से पानी निकाला जा रहा था वह उतना पानी बाहर नहीं निकाल पा रहे थे। अब भोपाल से पहुंचे हाई पावर पंपों की मदद से पानी को तेजी से बाहर निकाला जा रहा है ताकि मिट्टी में दबे हुए शवों को बाहर निकाला जा सके। इधर प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है लोगों ने घटना की जानकारी सूचना प्रशासन को देरी से दी।

रेस्क्यू में कहां-कहां हुई लापरवाही

गंजबासौदा में कुएं में बड़ी संख्या में लोगों के गिरने  की  घटना करीब शाम 6 बजे की बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलने के एक घंटे बाद करीब 7 बजे स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद रेस्क्यू का काम शुरू किया गया। वहां पर लगे  जिम्मेदार अफसरों और जनप्रतिनिधियों  ने कर्मचारियों के साथ मिलकर रेस्क्यू शुरू किया। लेकिन उन्हें घंटों रुकने के बाद यह बात समझ में नहीं आई कि कुएं से पानी निकालने के लिए मौजूदा पंप फेल होंगे। घंटों की लापरवाही के बाद भोपाल नगर निगम को हाई पावर पंप के लिए जानकारी भेजी गई। इसके करीब 17 घंटे बाद भोपाल नगर निगम की मदद पहुंची। भोपाल नगर निगम की आपदा प्रबंधन शाखा ने 6 कर्मचारी, 5 पंप और दूसरे बचाव के उपकरण गंज बासौदा भेजे। कुएं से तेजी से पानी निकालने का काम हाई पावर पंप कर रहे हैं। मौजूदा पंप जितना पानी निकाल रहा है उससे कहीं ज्यादा नया पानी कुएं में लगातार आ रहा है। कुएं को पूरा खाली करने के लिए भोपाल से भेजे गए इन हाई पावर पंप का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रेस्क्यू में इसलिए आ रही है परेशानी

कुएं में गिरे लोगों को निकालने में काफी परेशानी आ रही है। रात होने की वजह से रेस्क्यू सही तरीके से नहीं चला। जेसीबी मशीन जब खुदाई करने लगी तो भूरभूरी जमीन होने की वजह से ऊपर की मिट्टी धंसक जाती। इसलिए दोबारा खोदकर मिट़्टी हटानी पड़ रही है। भूरभरी मिट्टी होने की वजह से ही रात में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ट्रैक्टर पलट गया। जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बचाव दल के 3 लोग मलबे में दब गए थे। इसके अलावा कुएं से निकाला गया पानी झीर से दोबारा आ रहा है, इसलिए पानी कम नहीं हो रहा है।

कांग्रेस ने बनाई जांच कमेटी; कमलनाथ का तंज- विदिशा में मौजूद रहने के बाद भी घटनास्थल पर नहीं गए शिवराज

विदिशा के लाल पठार कुआं हादसे को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हादसे के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, आश्चर्यजनक बात है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा में मौजूद रहने के बाद भी घटना स्थल पर नहीं पहुंचे। यह गंभीर मामला है कि प्रशासन के आला अधिकारी कहीं और व्यस्त होने के कारण घटनास्थल पर देर से पहुंचे। कांग्रेस ने हादसे की जांच के लिए कमेटी बनाई है।कमलनाथ ने जारी बयान में कहा, थोड़ी देर बाद भीड़ के दबाव से इस कुएं की मुंडेर धंसने से कई लोग गहरे पानी में गिर गए। उनका आरोप है, घटनास्थल पर जिम्मेदार प्रशासन के आला अधिकारी काफी देरी से पहुंचे। एनडीआरएफ का दल भी रात 10 बजे के आसपास मौके पर पहुंचा, जिसके कारण राहत कार्य भी देरी से शुरू हुआ। उन्होंने कहा, क्षेत्र में पानी के संकट के कारण लोग इसी जर्जर कुएं से पानी लेने को मजबूर थे। इसकी जगत काफी क्षति ग्रस्त और जर्जर हो चुकी थी। इसकी मरम्मत की मांग भी कई बार उठी, लेकिन जिम्मेदार प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। कमलनाथ ने कहा कि राहत कार्य देरी से प्रारंभ होने के कारण कई लोगों को बचाया नहीं जा सका। कई अभी भी लापता हैं।

मृतकों के परिजनों को 15 लाख रुपए मुआवजा दें

कमलनाथ ने शिवराज सरकार से मांग की है, प्रत्येक मृतक के परिवार को 15 लाख रुपए और घायलों को 2-2 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाए। उन्होंने कहा है कि सरकार मृतक के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने के साथ सभी घायलों का सरकारी खर्च पर इलाज करवाए। बता दें कि मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए सहायता देने की घोषणा की है।

मौके पर जाएगी कांग्रेस की जांच कमेटी

कमलनाथ ने घटना की जांच को लेकर कांग्रेस की एक जांच टीम बनाई है। जो मौके पर जाकर पूरी जांच रिपोर्ट मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी को सौंपेगी। जांच दल में विदिशा जिला कांग्रेस अध्यक्ष कमल सिलाकारी, विधायक शशांक भार्गव, पूर्व विधायक निशंक जैन और शैलेंद्र पटेल को शामिल किया गया है।



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