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 कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की स्कूली शिक्षा के लिए वार्षिक फीस के अंतर्गत आर्थिक सहायता करेगा जे.एम. फाइनेंशियल फाउंडेशन


अहमदाबाद | गुजरात में कोरोना महामारी के कारण माता-पिता या दोनों में किसी एक को गंवाने वाले 18 वर्ष की उम्र तक के बच्चों की पढ़ाई के लिए जे.एम. फाइनेंशियल फाउंडेशन की ओर से स्कूल की वार्षिक फीस के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस उद्देश्य से गुरुवार को गांधीनगर में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की प्रेरक उपस्थिति में गुजरात सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उच्च अधिकारी और मुंबई के जे.एम. फाइनेंशियल  फाउंडेशन की निदेशक और कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) प्रमुख के बीच आशय पत्र यानी लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इस मौके पर कहा कि कोरोना महामारी में माता-पिता दोनों को खोने वाले बच्चों के पालन-पोषण की चिंता कर राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ कार्यान्वित की है। इस योजना के अंतर्गत कोरोना महामारी में अपने माता-पिता दोनों का साया खो चुके ऐसे अनाथ बच्चों को प्रति माह 4000 रुपए की सहायता दी जाती है। उन्होंने कहा कि योजना की घोषणा के महज 38 दिनों में ही राज्य सरकार ने सर्वे कर 7 जुलाई को 776 बच्चों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के जरिए 31 लाख रुपए से अधिक रकम जमा कराई है। अभी इस प्रकार के बच्चों की अनुमानित संख्या 881 है जिन्हें सरकार स्वयं चलकर सहायता कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सच्चे अर्थ में ऐसे बेसहारा बच्चों का सहारा बनी है। रूपाणी ने कहा कि जे.एम. फाइनेंशियल  फाउंडेशन के इस शैक्षणिक सेवा कार्य के जरिए 18 वर्ष की उम्र तक के बच्चों का शिक्षा शुल्क सीधे स्कूल में जमा कराया जाएगा, जिससे कि ऐसे बच्चे बिना किसी चिंता के आगे की पढ़ाई कर सकें। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े जे.एम. फाइनेंशियल  फाउंडेशन के निमेष कंपानी और विशाल कंपानी के साथ बात कर बच्चों के प्रति उनके इस सेवा कार्य की सराहना कर गुजरात सरकार की ओर से सभी आवश्यक सहयोग की तत्परता व्यक्त की। मुख्यमंत्री के सचिव अश्विनी कुमार ने कोरोना महामारी के चलते बेसहारा हुए बच्चों के लिए गुजरात सरकार की ओर से बनाई गई ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ की जानकारी देते हुए योजना के तहत हुए कार्य से अवगत कराया। राज्य के विभिन्न जिलों से ऐसे निराधार बच्चों को बुलाकर ‘मोकळा मने संवाद’ यानी खुले मन से संवाद नामक कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री और बच्चों के बीच हुए भावनात्मक संवाद की जानकारी भी उन्होंने दी। इसके अलावा उन्होंने गुजरात में निजी और सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की कैसे मदद की जाए, उस संबंध में जे.एम. फाइनेंशियल फाउंडेशन के पदाधिकारियों के साथ चर्चा की। 



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