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गया के विष्णुपद मंदिर की व्यवस्थाओं पर रोज 8000 रुपए खर्च होते हैं, लेकिन लॉकडाउन की चलते इनकम नहीं;


कोरोना महामारी और लॉकडाउन का वजह से अब बिहार के गया में स्थित विष्णुपद मंदिर की व्यवस्था बिगड़ने लगी है। अब भगवान के चारों पहर के साज-श्रृंगार, भोग, साफ-सफाई, मंगला आरती, गोशाला सब पर संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि चढ़ावा नहीं आने की वजह से रोज का खर्च नहीं निकल पा रहा।

श्रद्धालु भगवान के दर्शन किए बगैर ही मुख्य दरवाजे पर माथा टेककर वापस लौट रहे हैं। ऐसे में विष्णुपद मंदिर में दान आना पूरी तरह बंद हो गया है। पंडे जैसे-तैसे व्यवस्थाएं जुटाकर रोज पूजा-पाठ, श्रृंगार, भोग, आरती और गायों के चारे की पूर्ति कर रहे हैं।

मंदिर की व्यवस्थाओं में रोज 8-10 हजार रुपए खर्च होते हैं

पंडों का कहना है कि पिंडदानियों और भक्तों की ओर से दिए गए दान से ही भगवान श्रीहरि और माता लक्ष्मी का साज-श्रृंगार, चंदन लेप, फूल-माला, दुग्ध स्नान, तुलसी अर्चना, चारों पहर की विशेष पूजा-अर्चना, आरती, सुबह-शाम की खीर-पूड़ी, फल, मिठाई और दूसरी तरह के भोग लगाए जाते हैं। साथ ही भगवान की चार गायों के रखरखाव और खान-पान पर भी खर्च किए जाते हैं।

मंदिर समिति के अध्यक्ष शंभु लाल बिठ्‌ठल का कहना है कि आम दिनों में हर पिंडदानी कम से कम 10 रुपये की रसीद कटाते ही हैं। लेकिन अप्रैल से लेकर अब तक समिति के पास कहीं से पैसे नहीं आ रहे। दान पेटियां खाली हो गई हैं।

श्रद्धालु भगवान के दर्शन किए बगैर ही मुख्य दरवाजे पर माथा टेककर वापस लौट रहे हैं। ऐसे में विष्णुपद मंदिर में दान आना पूरी तरह बंद हो गया है। पंडे जैसे-तैसे व्यवस्थाएं जुटाकर रोज पूजा-पाठ, श्रृंगार, भोग, आरती और गायों के चारे की पूर्ति कर रहे हैं।


मंदिर में चार बार वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना होती है

सबसे पहले सुबह चार से पांच बजे के बीच में शहद, दूध से स्नान होता है।

साथ ही चंदन का लेप और फूल-माला से श्रृंगार किया जाता है। भगवान को नए वस्त्र भी भेंट किए जाते हैं। इसके बाद मंगला आरती होती है।

विष्णु भगवान के अलावा गर्भगृह में माता लक्ष्मी, गणेश आदि देवी-देवताओं का भी श्रृंगार-पूजन और भोग चढ़ता है।

दोपहर में खीर-पूड़ी का कच्चा भोग लगाया जाता है।

 

शाम छह बजे श्रृंगार के साथ पूजा-अर्चना होती है। इसके बाद रात में शयन पूजा और आरती होती है।

पंडा रतन जी, अशोक बारीक, गोविंद जी का कहना है कि मंदिर के बंद रहने से पंडा समाज की हालत भी बिगड़ गई है। जिस तरह से लॉकडाउन की गाइडलाइन के तहत दुकानें खोलने, बसें-ट्रेनें चलाने की अनुमति दी गई है, उसी तर्ज पर मंदिर को भी खोलने का आदेश दिया जाना चाहिए। ताकि भक्त भगवान की शरण में आ सकें और हमारी भी रोजी-रोटी चल सके।

विश्वप्रसिद्ध है विष्णुपद मंदिर

गया के विष्णुपद मंदिर में देश के कोने-कोने से लेकर विदेशों में रह लोग भी अपने पितरों का पिंडदान करने के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि गया की फल्गु नदी के किनारे विष्णुपद मंदिर में स्थित चरण-स्थली पर पिंडदान किए जाने के बाद ही पितरों को मोक्ष प्राप्ति हो सकेगी



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