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सबसे खूबसूरत ‘चाबी का छेद’


रोम में एक दरवाजे के ‘कीहोल’ (चाबी के छेद) के अंदर दुनिया के सबसे प्रसिद्ध गिरजाघरों में से एक का शानदार नजारा मन मोह लेता है। माइकल एंजेलो की कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध इस गिरजाघर के दृश्य वाले ‘कीहोल’ के पीछे एक वास्तुकार हैं जिनका प्रभाव आज भी दुनिया पर बरकरार है। इटली की राजधानी रोम शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा शहर है जहां एक साधारण से दरवाजे के ताले में बने चाबी के छेद (कीहोल) में देखने के लिए आपको हमेशा पर्यटकों की एक लम्बी कतार नजर आएगी। इस छेद से एक शानदार दृश्य नजर आता है- पेड़ों की हरी-भरी सुरंग के बीच से सेंट पीटर्स गिरजाघर का अति सुंदर गुंबद। अक्सर बंद रहने वाला यह दरवाजा रोम के एवेंटीन हिल पर स्थित है परंतु लोग इससे गुजरने की आस में यहां कतार लगाए इंतजार नहीं करते हैं बल्कि असली आकर्षण इस दरवाजे में चाबी लगाने के लिए बना छेद है जिसमें से सेंट पीटर्स गिरजाघर का अद्भुत नजारा मन मोह लेता है जैसे कि आप किसी टैलीस्कोप से देख रहे हों।

वास्तुकार गियोवान्नी बतिस्ता पिरानेसी का कमाल

एक अद्भुत भ्रम-सा प्रतीत होने वाला यह दृश्य रोम का प्रमुख पर्यटक आकर्षण बन गया है जिसका श्रेय 17वीं शताब्दी के ‘नियोक्लासिकल’ शैली के वास्तुकार तथा चित्रकार गियोवान्नी बतिस्ता पिरानेसी को जाता है। इटली के एक और खूबसूरत शहर वेनिस में जन्मे गियोवान्नी के जन्म की 300वीं वर्षगांठ 4 अक्तूबर को मनाई गई। उन्हें मुख्य रूप से उनकी शानदार नक्काशी के लिए याद किया जाता है और एवेंटीन हिल पर बनी संरचनाएं उनका बनाया एकमात्र वास्तुशिल्प है जो आज भी मौजूद है।1764 से 1766 के बीच गियोवान्नी ने एवेंटीन हिल पर माल्टा के योद्धाओं के इस मुख्यालय को पुनर्निर्मित करते हुए लॉरेल एवेन्यू का निर्माण किया जहां से सेंट पीटर्स गिरजाघर नजर आता है। अपने इस कार्य के तहत उन्होंने एक नया सार्वजनिक चौक भी तैयार किया जो कई तरह की कलाकृतियों तथा नक्काशी से सुसज्जित था। इसी के दरवाजे में बने चाबी के छेद को देखने के लिए अब पर्यटकों की कतार लगती है। साथ ही उन्होंने एवेंटीन में सांता मारिया चर्च का जीर्णोद्धार भी किया। रोम के सबसे पुराने गिरजाघरों में एक यह 10वीं शताब्दी का है जब इसकी स्थापना क्लूनी के एक भिक्षु ओडो ने की थी। आज यह इस शहर के छिपे हुए खजानों में से एक है। गियोवान्नी ने इसे नया रूप दिया और भीतरी हिस्सों को माल्टा के शूरवीरों के सम्मान में फिर से डिजाइन किया। बाहरी सजावट में हैल्मेट, तलवारें तथा जंजीरों में लिपटी ढालें आदि शामिल हैं जो 1517 में लेपांतो की लड़ाई में ओटोमन साम्राज्य की ऐतिहासिक हार का प्रतीक थे। गिरजाघर के अंदर एक स्मारक है जिसमें अनेक शासकों की कब्रें हैं। उनके साथ ही यहां खुद उन महापुरुष गियोवान्नी की राख तथा एक प्रतिमा है। आमतौर पर यह स्थल जनता के लिए खुला नहीं रहता लेकिन पहले से यहां सैर के लिए गाइडेड टूर बुक किया जा सकता है। इस टूर की एक खासियत सीमा पार करना है क्योंकि यह गिरजाघर माल्टा योद्धाओं के छोटे प्रादेशिक आधिपत्य का हिस्सा हैै। सर्वप्रथम यरुशलम में स्थापित यह एक अद्र्ध-राज्य है जिसके खुद के पासपोर्ट और दूतावास हैं लेकिन आज एवेंटीन कॉम्प्लैक्स और मध्य रोम की एक अन्य इमारत को छोड़कर इसकी कोई जमीन नहीं है। यह वेटिकन से स्वतंत्र है लेकिन इसके नेता पोप के प्रति निष्ठा की शपथ लेते हैं। आज के दौर में इसका उद्देश्य दुनिया भर में शरणार्थियों को आपातकालीन सहायता, चिकित्सा देखभाल और सहायता प्रदान करना है।

शानदार चित्रकार भी थे गियोवान्नी

गियोवान्नी के लिए चित्रकारी सबसे बड़ी विरासत है। उनकी रचनाओं में 17वीं सदी के रोम के नाटकीय परिदृश्यों से लेकर विचलित करने वाले चित्रों की शृंखला ‘कारसेरी’ (जेल) तक शामिल हैं। उनके बनाए जेलों के चित्र -जंजीरों की एक नारकीय उलझन, असंभव रूप से ऊंचे कमरे और सीढिय़ां जो कहीं भी नहीं जाती हैं – ने वास्तुकारों, चित्रकारों, लेखकों और सैट डिजाइनरों की कितनी ही पीढिय़ों को आश्चर्य में डाल रखा है। कई जानकारों के अनुसार सिनेमा जगत भी गियोवान्नी के प्रभाव से बच नहीं सका और ‘मैट्रोपोलिस’ व ‘ब्लेड रनर’ जैसी फिल्मों की अजीबो-गरीब जेलों से लेकर ‘हैरी पॉटर’ की चलती सीढिय़ों तक में उनके कार्यों की झलक दिखाई देती है।

 



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