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सिम्स के सर्जरी ओपीडी के सामने एक सफ्ताह से बेसुध पड़ा रहा मरीज, स्टाफ बेखबर 


बिलासपुर ।  एक हफ्ते से सर्जरी वार्ड के सामने मरीज बेसुद पड़ा रहा , किसी भी जिम्मेदार की नजऱ उसपर नही पड़ी , यह हाल है प्रदेश के नामचीन मेडिकल कॉलेजों में एक सिम्स आयुर्विज्ञान संस्था के अस्पताल की , जिम्मेदार केवल जानकारी नही होने की बात कह कर अपने जिम्मेदारियों से दूर भागते हैं ।

सिम्स अस्पताल के डॉक्टर मरीजों का इलाज कम और रिफर ज्यादा करते है । इस बात से सभी वाकिफ है । इलाज कराने आये हुए मरीजों का सही तरह उपचार हो भी रहा है या नही इसकी परवाह भी प्रबंधन को को नही है ? अगर इन अधिकारियों को अस्पताल में फैली हुई अव्यवस्था से वाकिफ़ कराने चाहे तो भी , सुनने को तैयार नही रहते ।

दरअसल सिम्स अस्पताल के पहले मंजि़ल में सर्जरी ओपीडी के सामने एक व्यक्ति बेसुद पड़ा रहा , ओपीडी के सामने बैठे कर्मचारियों से उक्त व्यक्ति के बारे पूछने पर किसी भी प्रकार की जानकारी होने से इंकार कर दिया । अंतत: व्यक्ति के पास जाकर उसे उठाकर पूछताछ की , तो बताया कि उसका नाम घनश्याम मिरी पिता दिनेश मिरी उम्र 45 वर्ष लोरमी , ग्राम खामी निवासी होना बताया , शहर में रिक्शा चाकर अपना जीवन- यापन करता है सप्ताह भर पहले कार चालक ने उसे ठोकर मार कर फरार हो गया, हादसे में उसके सीने और दाएं कंधे की हड्डी फैक्चर हो गई है , किसी तरह उपचार के लिए सिम्स अस्पताल पहुंचा और सर्जरी विभाग में डॉक्टर को दिखाया । डॉक्टर ने उसे एमआरडी की पर्ची के बैगर इलाज करने से मना कर दिया।

व्यक्ति अनपढ़ होने की वजह से कुछ समझ नही पाया हालांकि ओपीडी के सामने बैठे कुछ कर्मचारियों से मदद करने की गुहार लगाई , जिन्होंने नीचे जाने का रास्ता दिखा दिया । आखिर थक हारकर व्यक्ति उसी ओपीडी के सामने पड़े बेंच पर लेट गया और पिछले एक हफ्ते से उसी जगह पर दर्द से कराहते पड़ा है । वार्ड में मरीजों को खाना बांटने वाले कर्मचारी उसकी तकलीफ़ देख उसे खाना दे देते रहे । सोचनीय विषय यह है सिम्स की ओपीडी रोजाना खुल रही है कर्मचारी सामने टेबल लगाकर बैठते हैं मगर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी , कर्मचारियों को तड़पता हुआ मरीज दिखाई नही दिया । न ही किसी ने मानवता दिखाते हुए उसे डॉक्टर को दिखाकर भर्ती कराना जरूरी नही समझा ।

सिम्स में फैली अव्यवस्थाओं को देखकर ऐसा लगता है डॉ.पुनीत भारद्वाज पिछले अधीक्षकों की नक्शे कदम पर चल रहे हैं। जो दुर्दशा को बदलने किसी भी प्रकार की रुची नही रख रहे हैं । शायद इसका यही नतीजा है कि मरीजों के उपचार की सही दिशा नही मिल पा रही है ।



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