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CM अमरिंदर सिंह ने हिंदू नेताओं और पूर्व विधायकों को लंच पर बुलाया, उधर नवजोत सिंह सिद्धू दिल्ली में आलाकमान से मिले


पंजाब कांग्रेस में अंतर्कलह बढ़ती जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच का विवाद कम होता नजर नहीं आ रहा है। चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक हलचल मची हुई है। एक तरफ नवजोत सिंह सिद्धू दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात कर रहे हैं तो दूसरी ओर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फिर से ‘लंच डिप्लोमेसी’ शुरू कर दी है। कांग्रेस विधायकों की नब्ज टटोलने के लिए कैप्टन ने हिन्दू नेताओं और पूर्व विधायकों को गुरुवार को लंच पर बुलाया है।

अमरिंदर ने बटाला से कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री अश्वनी सेखड़ी को भी न्योता दिया है। इससे पहले अमरिंदर अपने घर पर विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के साथ चाय पर भी चर्चा कर चुके हैं। दरअसल कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की सरकार में लगातार हो रही उपेक्षा से हिंदू नेता नाराज हैं और पार्टी के दूर होते जा रहे हैं।

पंजाब कैबिनेट में पांच हिंदू मंत्री हैं। हिंदू मंत्रियों में ब्रह्म मोहिंदरा, ओपी सोनी, विजय इंदर सिंगला, सुंदर श्याम अरोड़ा और भारत भूषण आशु शामिल हैं। अमृतसर वेस्ट से विधायक राजकुमार वेरका भी हैं।

मुख्यमंत्री यह बैठक ऐसे समय में करने जा रहे हैं, जब कांग्रेस में नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपने की चर्चा चल रही है। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस के दो अहम ओहदे जट्ट सिखों के हिस्से में चले जाएंगे।


सिद्धू अपना गणित सुधारने में जुटे

दिल्ली में नवजोत सिंह सिद्धू आलाकमान से मिलकर अपना गणित सुधारने में लगे हैं। उन्होंने बुधवार को पहले प्रियंका गांधी से मुलाकात की और फिर शाम को राहुल गांधी से मिले थे। सिद्धू ने खुद सोशल मीडिया पर प्रियंका से मुलाकात की फोटो भी शेयर की।

सिद्धू से मुलाकात के बाद प्रियंका ने राहुल से 40-45 मिनट लंबी चर्चा की थी। बाद में दोनों सोनिया गांधी से भी मिले। सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में सिद्धू को डिप्टी सीएम, प्रचार और चयन समिति में लिए जाने पर तीन सदस्यीय कमेटी के मेंबर हरीश रावत, मल्लिकार्जुन खड़गे और जेपी अग्रवाल के साथ चर्चा हुई। इसमें सिद्धू को कैंपेन कमेटी में शामिल किए जाने पर सहमति बनती नजर आई।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस लीडरशिप सिद्धू को पार्टी में पोजिशन दिलाने की कोशिश में हैं। चर्चा है सिद्धू को कैंपेन कमेटी का प्रभारी बनाया जा सकता है। वहीं विरोध के बावजूद टिकट सलेक्शन कमेटी में भी उनकी अहम भूमिका रह सकती है। जबकि सिद्धू पार्टी प्रदेश अध्यक्ष का पद चाहते हैं लेकिन कैप्टन कहते हैं कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों सिख चेहरे नहीं हो सकते। इससे पार्टी की साख को नुकसान पहुंच सकता है।



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